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चुनावी माहौल में छापेमारी - टायमिंग और इरादे को लेकर सवाल

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स्वामी असीमानंद का बरी होना- किस दिशा में जा रही है भारतीय न्याय व्यवस्था ?

राम पुनियानी

भारतीय न्याय प्रणाली इन दिनों जिस ढंग से काम कर रही है, उससे न्याय पाना और दोषियों को सजा दिलवाना बहुत कठिन हो गया है. न्यायिक निर्णय, कार्यपालिका (पुलिस व अभियोजन) द्वारा न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत सबूतों पर आधारित होते हैं. ऐसे में, सत्ताधारी दल की विचारधारा और उसकी सोच की आपराधिक मुकदमों में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. कई मौकों पर, वर्चस्वशाली विचारधारा - भले ही उसके पैरोकार सत्ता में न हों - भी अदालती फैसलों को प्रभावित करती है. यह दुर्भाग्यपूर्ण परन्तु सच है. सन 1992-93 में मुंबई में भड़की सांप्रदायिक हिंसा में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे. परन्तु इस खूनखराबे के दौरान घटित गंभीर अपराधों के बहुत कम दोषियों को सजा मिल सकी. इस हिंसा के बाद, पाकिस्तान की आईएसआई के सहयोग से, मुंबई के अंडरवर्ल्ड ने मुंबई में अनेक बम विस्फोट किए, जिनमें करीब 200 व्यक्ति मारे गए. बम विस्फोटों से सम्बंधित प्रकरणों में कई लोगों को फांसी की सजा सुनायी गयी, अनेक को आजीवन कारावास से दण्डित किया गया और बड़ी संख्या में अन्यों को अलग-अलग अवधि की सजाएं दी गईं. इसमें कुछ भी गलत नहीं है और प्रजातंत…

भारत में स्कूली शिक्षा का विकास - बदलाव और चुनौतियां

जावेद अनीस

सार्वजनिक शिक्षा एक आधुनिक विचार है,जिसमें सभी बच्चों को चाहे वे किसी भी लिंग, जाति, वर्ग, भाषा आदि के हों, शिक्षा उपलब्ध कराना शासन का कर्तव्य माना जाता है.भारत में वर्तमान आधुनिक शिक्षा का राष्ट्रीय ढांचा और प्रबन्ध औपनिवेशिक काल और आजादी के बाद के दौर में ही खड़ा हुआ है. 1757 में जब ईस्ट इंडिया कम्पनी के हुकूमत कीशुरुआत हुई तब यहां राज्य द्वारा समर्थित एवं संचालित कोई ठोस शिक्षा व्यवस्था नहीं थी. हिन्दुओं और मुसलमानोंदोनों की अपनी निजी शिक्षा व्यवस्थाएं थीं.प्रारंभ मेंअंग्रेजों की नीति भारत में पहले से चली आ रही शिक्षा व्यवस्था का सहयोग करने की थी और जोर जोर इस पर था कि देश का शासन चलाने में उनकी मदद करने के लिए भारतीय अधिकारियों को संस्कृत,फारसी और अरबी में अच्छी तरह निपुण किया जाये और परंपरागत हिन्दू और मुस्लिम अभिजात वर्ग मेंअपनी साख बनायीं जा सके. इसी को ध्यान में रखत हुए 1781 में इस्लामी अध्ययन मुहैया कराने केलिए कलकत्ता मदरसा, 1792 में बनारस में बनारस संस्कृत कालेज आदि की स्थापना की गयी.
कालांतर में इस नीति में बदलाव हुआ अंग्रेजी शासन के लिए आधुनिक शिक्षा प्राप्त वर्…